रामपुरा/नीमच: जिला नीमच की रामपुरा तहसील अंतर्गत ग्राम बैंसला में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और कानून के साथ खिलवाड़ का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मस्सा और बवासीर के इलाज के नाम पर फर्जी क्लिनिक चलाने वाला तथाकथित 'डॉक्टर बंगाली' उर्फ मोहन मलिक को भले ही तथाकथित फरार बताया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि उसका अवैध धंधा आज भी टीन शेड और फार्म हाउसों पर धड़ल्ले से जारी है।

1 रुपये की ब्लेड के 4 टुकड़े... और लाखों का 'काली कमाई' का खेल:

सूत्रों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, यह तथाकथित डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हुए महज 1 रुपये की शेविंग ब्लेड के चार टुकड़े कर चार-चार ऑपरेशन निपटा रहा है। बिना किसी मेडिकल डिग्री और सुरक्षा मानकों के, टीन शेड और फार्म हाउस में जारी इस जानलेवा खेल से महीने में लाखों रुपये की अवैध कमाई की जा रही है।

सील टूटी, 8 दिन बीते... न FIR में धाराएं बढ़ीं, न हुई गिरफ्तारी:

प्रशासनिक अमले ने 8 दिन पहले शासकीय सीलबंद की कार्रवाई की पंचनामा बनाया था। आरोप है कि, आदतन कानून का उल्लंघन करने वाले मोहन मलिक ने शासकीय सील को भी तोड़ दिया। हैरत की बात यह है कि सरकारी सील तोड़ने जैसा गंभीर अपराध होने के बावजूद बीते 8 दिनों में न तो पुलिस ने एफआईआर में धाराएं बढ़ाईं और न ही आरोपी को गिरफ्तार किया।

मंत्रियों की धौंस और अधिकारियों के चक्कर!

चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिस आरोपी को तथाकथित 'फरार' दर्शाया जा रहा, वह अपने एक शस्त्रधारी शासकीय शिक्षक मददगार के साथ मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की धौंस दिखाते हुए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है। सील खुलवाने के लिए प्रशासनिक चौखटों पर खुलेआम घूमता यह तथाकथित डॉक्टर आखिर पुलिस की नजरों से कैसे ओझल है?

जिम्मेदार दे रहे अजीबोगरीब तर्क, उठ रहे गंभीर सवाल:

जब इस पूरे मामले पर जिम्मेदार अधिकारियों से बात की गई, तो उनके जवाबों ने प्रशासनिक उदासीनता की पोल खोलकर रख दी:

"मेरा काम धाराएं बढ़ाना और गिरफ्तार करना नहीं है।"

— डॉ. (CMHO, नीमच)

"शासकीय सील तोड़ने का शिकायती आवेदन थाने पर दिया जाएगा।"

— स्थानीय मेडिकल अधिकारी, रामपुरा

मिलीभगत, लापरवाही या राजनीतिक संरक्षण?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि, क्या स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस-प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं? आदतन आरोपी मोहन मलिक पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या इसे स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता माना जाए या आरोपी को मिल रहा कोई बड़ा राजनीतिक संरक्षण?

क्षेत्रीय जनता अब यह भी मांग उठा रही है कि, फर्जी डॉक्टर द्वारा वर्षों से मरीजों की जान से खिलवाड़ कर जुटाई गई बेहिसाब अकूत संपत्ति की भी निष्पक्ष जांच की जाए। देखना यह होगा कि इस जानलेवा फर्जीवाड़े पर प्रशासन की नींद कब टूटती है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है।