नीमच। छोटी बच्चियों के साथ अमानवीय बर्बरता के कई उदाहरण नीमच में लिखे जा चुके होंगे लेकिन पिछले दिनों 13 साल की मासूम बालिका के गर्भवती होने की घटना ने हिला कर रख दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन जरूर हरकत में आया लेकिन समाज में उदाहरण प्रस्तुत करने वाली कोई भी कार्रवाई नहीं कर पाया। दोषी लड़के के परिवार पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता है। अगर कार्रवाई कठोर नहीं हुई तो यह 13 साल की मासूम बालिका के साथ बड़ा अन्याय होगा जो अब भविष्य में शायद माँ भी ना बन सके। 
दुष्कर्म करने वाला नाबालिक था और एक नहीं लगभग 10 से 15 छोटी-छोटी मासूम बच्चियों के साथ उसके संबंध थे। क्या पता उसने ही नहीं, उसके परिवार, मिलने वाले, दोस्तों आदि ने भी उन बच्चियों के साथ संबंध बनाएं हो उनके फोटो वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया हो और यह कुकर्म पिछले कई महीनो से बदस्तूर जारी था।  मामला सामने तब आया जब एक छोटी मासूम बालिका गर्भवती हो गई, परिवारजनों को उसका पता चला तो पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई, बच्ची को हॉस्पिटल लेकर दौड़े और बात पुलिस के कानों तक पहुंची एसपी राजेश व्यास ने तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की, दोषी लड़के को पकड़ा और नाबालिक होने की वजह से बाल सुधार गृह की दिशा दिखाई। लेकिन सिर्फ इतनी सी कार्रवाई कर भर देने से नीमच में बच्चों के साथ हो रहा दुर्व्यवहार रूक पाएगा या जिस नाबालिक को उसके परिवार जनों और समाज ने उत्साहित कर इस कुकृत्य के लिए प्रेरित किया उन पर भी कार्रवाई कर कर शासन प्रशासन समाज में एक आदर्श स्थापित करेंगे। क्या यह सिर्फ एक ही मामला है या एक पूरा नेक्सस इसके पीछे सक्रिय है, क्यों नहीं उस दोषी के खारी कुआं स्थित मकान को जमींदोज किया गया, क्यों नहीं उसके परिवार को समाज के सामने लाया गया, आखिर और कौन कौन लोग हैं जो नीमच में मानवता को शर्मसार कर रहे हैं इंसानियत के नाम पर बदनुमा दाग हैं। आखिर वह कौन है जो गजवा ए हिंद और आदमखोर के नाम से व्हाट्सएप ग्रुप चला रहे है। एक-एक बच्ची की जानकारी इन ग्रुपों में शेयर होती है किसका परिवार कितना मजबूत या कितना कमजोर है यह जानकारियां, किसके परिवार में कितने लोग हैं यह जानकारियां, कौन पैसों से, दिखावे से, डरा धमका कर बस में किया जा सकता है यह जानकारियां इन ग्रुप में शेयर होती है। इन ग्रुपों का यह आलम है कि नीमच एक बहुत बड़े नेक्सस में फंसा हुआ है जहां आए दिन कभी चौराहों पर, तो कभी स्कूलों में, कभी कॉलेज जाने वाली लड़कियां तो कभी बाग बगीचे में टहलने वाली युवतियां इनका शिकार हो रही है। 
समस्या इतनी बड़ी है, जटिल है कि सिर्फ समाचार पढ़ने भर से या गंगानगर के वीडियो देखने मात्र से समाप्त नहीं होगी। समाज को जागृत होना होगा, हर माता-पिता को सक्रिय होना होगा। आज सिर्फ बच्चों को पैदा कर कर उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति कर देना भर ही माता-पिता का कर्तव्य नहीं है बल्कि ऐसे राक्षसों के चंगुल से अपने नोनीहालों को बचाना भी उनका कर्तव्य है। चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी हद तक क्यों न जाना पड़े, तन से, मन से, धन से, वचन से सारे समर्थ क्यों ना लगाना पड़े, उन्हें आगे आना होगा आज उम्र कोई मायने ही नहीं रख रही है कितने ही मामले समाज में देखने को मिल रहे हैं जहां छोटी-छोटी बच्चियों को शिकार बनाया जा रहा है। एक बार कोई बच्ची इस नेक्सस में फंस जाती है तो उसका शोषण प्रारंभ हो जाता है जो जीवन भर चलता है और उनके साथ ब्लैकमेलिंग कर कर गलत कार्य किए जाते हैं। 
अब सामाजिक संगठनों को आगे आना होगा, समाज को जागृत होना होगा आज भी अगर समाज सोया रहा तो यह हादसे उनके साथ भी घटित हो सकते हैं। कहने को कार्रवाई तो हुई लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ एक नाबालिक को गिरफ्तार कर लेना काफी नहीं है अगर कोई नाबालिक सड़कों पर वाहन दौड़ाते हैं तो उसके लिए जब यातायात पुलिस उनके अभिभावकों को दोषी मान सकती है तो क्या ऐसे गंभीर अपराधों में माता-पिता दोषी नहीं है? क्या माता-पिता की जानकारी के बिना एक लड़का 10 से 15 बच्चियों के साथ संबंध बना पा रहा है। जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, उनके मकान जमींदोज नहीं होंगे इसे न्याय नहीं माना जा सकता है।  ऐसा ना हो कि नीमच में भी गंगानगर की तरह लोग सड़कों पर उतर आए हिंदू संगठन और अन्य समाजसेवी संगठन कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाएं और यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर छा जाए। इससे पहले ही पुलिस प्रशासन को सतर्क होकर कार्रवाई करना चाहिए तभी समाज में ऐसे दरिंदे, वहशी, राक्षसों पर लगाम लग सकेगी। आज समाज को मुफ्त का अनाज और फ्री के पैसे नहीं चाहिए बल्कि अपने बच्चों की सुरक्षा चाहिए अगर शासन प्रशासन यह सुरक्षा नहीं दे पाएगा तो सिस्टम पूरी तरह से फेल हो जाएगा।