मामला बिना डिग्री तथाकथित डॉक्टर मोहन मलिक बंगाली ग्राम बैंसला द्वारा अवैध क्लिनिक संचालन व खुले में बायोवेस्ट फेंकने का...,
रामपुरा/नीमच: मध्यप्रदेश डिप्टी सीएम श्री देवड़ा के गृह निवास जिला नीमच अंतर्गत रामपुरा क्षेत्र के ग्राम बैंसला में बिना डिग्री धारी तथाकथित डॉक्टर मोहन मलिक बंगाली गत 05 माह से प्रशासन के लिए नासूर बना हुआ कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा, या यूं कहे कि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों की मिली भगत सहानुभूति अथवा बेबसी कहना एक विचारणीय मुद्दा हैं।
मामलानुसार , रामपुरा तहसील अंतर्गत ग्राम बैंसला क्षेत्र में सूचना तंत्र से प्राप्त सूचनानुसार स्थानीय बैंसला में बिना डिग्रीधारी तथाकथित मस्सा बवासीर डॉक्टर मोहन मलिक बंगाली द्वारा क्लिनिक का संचालन गत कई वर्षों से किया जा रहा हैं, तथा क्लिनिक का बायोमेडिकल वेस्ट मटेरियल ग्राम के नज़दीक पुलिया में फेंकना सामने आया, जिसकी जन तथा पर्यावरण हित याचिका कर्ता द्वारा शिकायत दिनांक 24 फरवरी 2026 को जिला कलेक्टर नीमच की जन सुनवाई में की गई, जिसमें दो माह पश्चात गति देते हुए जिला व उपखंड स्वास्थ विभाग ने दिनांक 24 अप्रैल को याचिकाकर्ता की उपस्थिति में मौके का मुआयना कर पंचनामा तैयारी किया, पश्चात इसके सुपरफास्ट गति के साथ 01 मई को राजस्व विभाग, पुलिस विभाग व स्वास्थ्य विभाग टिम द्वारा क्लिनिक को शासकीय सीलबंद कार्यवाही कि गई । कहानी में ट्विस्ट तो तब आता हैं कि , एक दिन पश्चात उक्त तथाकथित डॉक्टर द्वारा क्लिनिक की शासकीय सील तोड़ कर ईलाज उपकरण को निवास परिसर में ही चद्दर शेड में सेट कर ईलाज पुनः शुरू कर लिया जाता हैं, जिसके तथ्य सबूत से समय समय पर जिम्मेदार प्रशासन को अवगत भी कराया जाता हैं कि, आज दिनांक तक कोई वैधानिक कार्यवाही नहीं की गईं। इसी बीच प्रशासन द्वारा वहीं संचालित मेडिकल स्टोर को 07 दिवस हेतु सील कर पुनः बासम्मान खोल दिया जाता हैं जिसकी आड़ में पुनः ऑपरेशन ईलाज का खेल अनवरत जारी हैं किंतु जिम्मेदार प्रशासन को ना जनता से कुछ लेना है और ना पर्यावरण से ?
जिम्मेदार प्रशासन की तथाकथित डॉक्टर से क्या सहानुभूति क्या बेबसी किसका संरक्षण या कुछ और ? यह एक विचारणीय प्रश्न हैं।
स्थानीय लोगों का कहना हैं कि,
डिप्टी सीएम के गृह क्षेत्र में एक झोलाछाप को संरक्षण क्यों हैं ? बंगाली पहले भी कई बार यूं ही छूट चुका हैं, इन सब में एक दलाल कम शस्त्रधारी शासकीय शिक्षक की भूमिका मुख्य हैं जो अक़्सर उपखंड सहित जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों के कार्यालयों में दिखाई देता हैं।
ग्रामीणों का कहना हैं कि, 20 वर्ष पूर्व ये डॉक्टर एक टेबल कुर्सी लेकर आया था, आज ये कई बीघा भूमि का मालिक हैं व कई जगह प्लॉट मकान भी हैं।


