नीमच। सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) 2005 के तहत तय समय सीमा में जानकारी न देना और वरिष्ठ न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करना नीमच जिले में प्रशासनिक ढर्रे पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। ताजा मामला न्यायालय अतिरिक्त कलेक्टर एवं अपीलीय अधिकारी (आरटीआई) नीमच का है, जहाँ तीन बार नोटिस जारी होने के बावजूद अनुपस्थित रहने वाले महिला एवं बाल विकास अधिकारी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए अपील स्वीकार की गई है। न्यायालय ने अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे आवेदक को 7 दिवस के भीतर चाही गई जानकारी निशुल्क उपलब्ध कराएं।
जानकारी के अनुसार, नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता गिरजा शंकर परिहार ने दिनांक 30 जनवरी 2026 को महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी नीमच को धारा 6 (1) के तहत एक आवेदन प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने जावद परियोजना, रतनगढ़ परियोजना, नीमच ग्रामीण और नीमच शहरी क्षेत्रों में अटैच वाहनों की टेंडर विज्ञप्ति की प्रमाणित प्रतियां मांगी थी। कानूनन 30 दिनों के भीतर जानकारी दी जानी अनिवार्य थी, लेकिन विभाग द्वारा समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। सूचना न मिलने से व्यथित होकर कार्यकर्ता गिरजा शंकर परिहार ने 13 मार्च 2026 को प्रथम अपीलीय न्यायालय (अतिरिक्त कलेक्टर, नीमच) के समक्ष धारा 19 (1) के तहत प्रथम अपील दायर की (प्रकरण क्रमांकः 0012/अपील सूकाअ/20026-27)
न्यायालय द्वारा सुनवाई के लिए तीन तारीखें 02 अप्रैल 2026, 09 अप्रैल 2026 एवं 15 अप्रैल 2026 तय की गईं। इन तीनों ही तारीखों पर अपीलांट गिरजा शंकर परिहार तो न्यायालय में उपस्थित हुए, लेकिन लोक सूचना अधिकारी व जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) न तो स्वयं उपस्थित हुए और न ही न्यायालय में कोई जवाब या प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
इस घोर लापरवाही और उदासीनता को देखते हुए न्यायालय अतिरिक्त कलेक्टर एवं अपीलीय अधिकारी ने 30 अप्रैल 2026 को आदेश पारित किया। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विभाग को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु तीन बार सूचना पत्र जारी किए जाने के बाद भी कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। अतः अपीलांट की अपील स्वीकार योग्य है। न्यायालय ने संबंधित लोक सूचना अधिकारी एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास, नीमच) को कड़े निर्देश दिए किः ‘‘अपीलार्थी द्वारा चाही गई जानकारी नियमों के परिप्रेक्ष्य में सात दिवस के भीतर निशुल्क उपलब्ध कराई जाए तथा इसका प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करें।‘‘
आदेश के बाद भी टालमटोल, अब राज्य सूचना आयोग जाएगी शिकायत
विडंबना यह है कि न्यायालय के इस स्पष्ट आदेश के बाद भी महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आज दिनांक तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके साथ ही प्रशासनिक सुस्ती का आलम यह है कि 30 अप्रैल को जारी हुए आदेश की प्रति नीमच शहर के भीतर ही आवेदक तक डाक द्वारा पहुँचने में 11 दिन लग गए और यह उन्हें 11 मई 2026 को प्राप्त हुई।
आरटीआई कार्यकर्ता गिरजा शंकर परिहार का कहना है कि नीमच जिले में जब से कलेक्टर हिमांशु चंद्रा आए हैं, तब से कई विभागों में सूचना के अधिकार की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भ्रष्टाचार और गड़बड़ी वाले मामलों में अक्सर ‘जानकारी स्पष्ट नहीं है‘ जैसा बहाना बनाकर आवेदनों को निरस्त कर दिया जाता है। कलेक्टर से निवेदन है कि जिले के अधिकारियों-कर्मचारियों को आरटीआई अधिनियम की ट्रेनिंग दी जाए। श्री परिहार ने कहा कि वे अब इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग, भोपाल में द्वितीय अपील दायर करेंगे।


