रामपुरा/नीमच: नीमच ज़िले के रामपुरा वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम खेतपालिया (वन्य क्षेत्र क्रमांक 423) में करोड़ों रुपये की वन भूमि पर भूमाफियाओं के अवैध कब्ज़े और वन विभाग की मिलीभगत से जुड़ा मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर आ गया है। इस पूरे प्रकरण में वन विभाग की मनमानी, लापरवाही और तानाशाही का आलम यह है कि अब सच्चाई दबाने के लिए ग्रामीणों को खुलेआम डराया-धमकाया जा रहा है।

 

सूत्रों से प्राप्त बेहद चौंकाने वाली जानकारी के अनुसार, जब इस पूरे मामले से तंग आकर ग्रामीण जनों ने न्याय के लिए सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत दर्ज कराई, तो ज़िम्मेदार वन अधिकारी बौखला गए। आरोप है कि संबंधित वन अधिकारी द्वारा शिकायत करने वाले ग्रामीणों को लगातार डराया-धमकाया जा रहा है और सीएम हेल्पलाइन की शिकायत को जबरन बंद कराने या हटाने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा है।

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विभाग की कार्यप्रणाली पर पहले ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि, गत 17 अक्टूबर को वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने के नाम पर जो बुलडोजर कार्रवाई की गई थी, वह महज़ एक छलावा साबित हुई। टीम ने केवल खुली और खाली पड़ी ज़मीन पर बुलडोजर चलाकर कोरम पूरा कर लिया, जबकि भूमाफियाओं द्वारा कब्ज़े में ली गई मुख्य और असली अतिक्रमित ज़मीन को छुआ तक नहीं गया—जिसका सीधा फायदा माफियाओं को मिला।

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वहीं, भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए अधिकारियों ने कानून की सभी सीमाएं लांघ दी हैं। जब इस वन भूमि अतिक्रमण से जुड़ी जानकारी 'सूचना का अधिकार' के तहत मांगी गई, तो पदस्थ संबंधित वन अधिकारी ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए जानकारी देने से इनकार तो किया ही, साथ ही आरटीआई आवेदन की गोपनीयता को भी ताक पर रख दिया। सूत्रों के अनुसार, आवेदक द्वारा मांगी गई संवेदनशील जानकारी को बाहरी व्यक्तियों के साथ साझा कर दिया गया, जिससे शिकायतकर्ता की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

 17 अक्टूबर का दिखावटी बुलडोजर ड्रामा, RTI कानून का उल्लंघन और अब सीएम हेल्पलाइन की शिकायत पर ग्रामीणों को धमकाने जैसे संगीन कृत्यों को लेकर जब मीडिया ने ज़िम्मेदार अधिकारियों से पक्ष जानना चाहा, तो वे पूरी तरह बगले झांकते नज़र आए।

​करोड़ों की सरकारी ज़मीन बचाने के बजाय भूमाफियाओं को संरक्षण देने और आम जनता व ग्रामीणों पर दबाव बनाने वाले इन ज़िम्मेदार अधिकारियों पर अब कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग ज़ोर पकड़ने लगी है।