रामपुरा (नीमच)। गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य अपनी अनूठी और समृद्ध जैव विविधता के लिए देश-दुनिया में विशेष पहचान रखता है। वर्तमान में यह अभयारण्य चीता पुनर्स्थापन परियोजना के केंद्र के रूप में भी उभर रहा है, जो इसे पारिस्थितिक रूप से और भी महत्वपूर्ण बनाता है। इस समृद्ध प्राकृतिक धरोहर, वन्यजीवों और वनस्पतियों से पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को रूबरू कराने के उद्देश्य से वन विभाग द्वारा एक विशेष पहल की गई है।
13 अक्टूबर 2026 को रामपुरा स्थित इंटरप्रिटेशन सेंटर (नगर वन) में 'फील्ड गाइड बुक' का गरिमामय विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह मार्गदर्शिका पुस्तक लास्ट वाइल्डरनेस फाउंडेशन द्वारा उपलब्ध कराई गई है, जो गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य और उसके आस-पास के वन क्षेत्रों के नेचर गाइड्स, वनकर्मियों तथा यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए एक बेहद मददगार और ज्ञानवर्धक स्रोत साबित होगी।
इस विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रामपुरा रेंजर श्री भानु प्रताप सिंह सोलंकी एवं डिप्टी रेंजर श्री आशीष शर्मा रहे, जिनके कर-कमलों द्वारा इस फील्ड गाइड बुक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में वन विभाग की ओर से वनरक्षक श्री रघुवीर सिंह चंद्रावत एवं श्री अरविंद सिंह चौहान सहित अन्य स्टाफ विशेष रूप से उपस्थित रहा। इस अवसर पर स्थानीय नेचर गाइड्स, मैडम क्यूरी हाई स्कूल के विद्यार्थियों तथा रामपुरा ग्राम के स्थानीय समुदाय ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।
पुस्तक विमोचन के पश्चात वन्यजीव विशेषज्ञ हिमांशु सिंह राठौर ने उपस्थित नेचर गाइड्स, विद्यार्थियों एवं स्थानीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर के महत्व और उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रकृति एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में इसकी क्या भूमिका है। उन्होंने स्थानीय जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने तथा पर्यावरण संरक्षण में स्थानीय समुदाय व युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इस फील्ड गाइड बुक के माध्यम से प्रकृति, चीता परियोजना और अन्य वन्यजीवों से संबंधित सटीक जानकारी को बढ़ावा देना था, ताकि फ्रंटलाइन स्टाफ और गाइड्स पर्यटकों को बेहतर ढंग से गाइड कर सकें।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों के लिए नाश्ते की व्यवस्था की गई और एक सकारात्मक व ऊर्जावान वातावरण में कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन प्रकृति शिक्षा, वन्यजीव संरक्षण एवं स्थानीय समुदाय की सहभागिता को बढ़ावा देने की दिशा में वन विभाग और लास्ट वाइल्डरनेस फाउंडेशन की एक बेहद महत्वपूर्ण व सराहनीय पहल रहा।



