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​ ​रामपुरा/नीमच: बिना किसी वैध मेडिकल डिग्री और अनुमति के लंबे समय से चल रहा मस्सा बवासीर इलाज ऑपरेशन।

​जानलेवा लापरवाही: एक ब्लेड के चार टुकड़े कर, एक-एक टुकड़े से किए जा रहे ऑपरेशन।

 

​प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां: दो-दो बार क्लिनिक सील किया गया और पुलिस FIR दर्ज हुई, फिर भी इलाज और ऑपरेशन जारी।

​पुलिस का तर्क: पुलिस का कहना— "समझ नहीं आ रहा किन धाराओं में दर्ज करें दोबारा FIR?"

​ घटना का विस्तृत विवरण

​जिला नीमच के रामपुरा क्षेत्र स्थित ग्राम बैंसला से स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक तथाकथित 'डॉक्टर बंगाली' बिना किसी वैध डिग्री और बिना प्रशासनिक अनुमति के धड़ल्ले से अवैध क्लिनिक चला रहा है।

​1. गंभीर प्रशासनिक अवहेलना

​प्रशासन द्वारा पूर्व में इस अवैध क्लिनिक पर दो बार सीलबंद (डबल सील) की कार्रवाई की जा चुकी है और पुलिस में प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज कराई गई है। इसके बावजूद झोलाछाप डॉक्टर के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह बेखौफ होकर आवास परिसर व फार्म हाउस पर ही संचालन कर रहा है और मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है।

​2. अमानवीय और जानलेवा इलाज

​जांच/खुलासे में सामने आया है कि, क्लिनिक में स्वच्छता और मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। संक्रमण से बचाव के न्यूनतम साधनों की जगह एक ही ब्लेड के चार टुकड़े करके, एक-एक टुकड़े से मरीजों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। यह तरीका मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

 उठते गंभीर सवाल?

​1. पुलिस की सुस्ती या अनभिज्ञता?

लगातार प्रशासनिक सील टूटने और अवैध संचालन के बावजूद पुलिस का यह कहना कि "किन धाराओं में कार्रवाई करें?" कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।

​2. क्या मेडिकल एक्ट के पुनरीक्षण की आवश्यकता है?

जब स्पष्ट रूप से बिना डिग्री इलाज और फर्जीवाड़ा सामने है, तो पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण यह 'मुन्नाभाई' लगातार बच निकलता है। क्या इस मामले में सख्त मेडिकल एक्ट के तहत तत्काल और कड़ी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?

​स्थानीयों का कहना हैं कि, शासन-प्रशासन की बार-बार की कार्रवाई के बावजूद अवैध क्लिनिक का जारी रहना किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। स्वास्थ्य विभाग और नीमच पुलिस प्रशासन को तुरंत कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।